:: द्रौपदी के अंग पर चीर नहीं दिखता ::


मन लिखने की चाह करता बहुत किन्तु

लिखने के लायक नहीं है कुछ दिखता

टी॰ वी॰ बेटे-बेटियों के संग देखना जो चाहूँ

देखने के लायक नहीं है कुछ दिखता

सभ्यता औ संस्कृति की धज्जियाँ उड़ा रही जो

यश की ही चाह में चरित्र नहीं दिखता

ऐसी द्रौपदी का चीर कैसे बढ़ाएँगे कृष्ण

द्रौपदी के अंग पर चीर नहीं दिखता

 
 
 
   
 
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
 
     
     
     
 
     
 

 

 
 

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