:: कविता ::


मंत्री चाहे रूठ जायें घोटालों में छूट जायें

झूठ के सभी कपाट खोलती है कविता

मणियाँ मिलें या हथकड़ियाँ मिलें कवि को

सत्य को तराज़ू में ही तोलती है कविता

बात चाहे छोटी लगे खरी और खोटी लगे

सबके हितों की बात बोलती है कविता

माँग का सिंदूर जले गोली सीमाओं पे चले

देश प्रेमियों में आग घोलती है कविता

 
   
 
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
 
     
     
     
 

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