:: प्यार आत्मा का विस्तार ::


प्यार हास प्यार परिहास है सुहास प्यार

प्यार नव श्वास प्यार आस विश्वास है ।

प्यार हरता जलन दूर करता तपन

छाया बांटता सघन प्यार उल्लास है।

प्यार ही निखार लाये सोलह सिंगार भाये

प्यार ही बहार लाए प्यार मधुमास है ।

प्यार है अनन्त मीरा तो प्रमाण है ज्वलन्त

प्यार कृष्ण और राधिका का महारास है ॥

 

प्यार है गगन प्यार विहग मगन

प्यार मलय पवन प्यार पावन रतन है।

अभिनव राग प्यार नेह अनुराग प्यार

रंगभरा फाग प्यार मेघ सा सघन है ।

मोहक बहार प्यार सरस फुहार प्यार

शीतल बयार प्यार शीत की किरन है ।

आवरण नहीं प्यार वरण है प्यार

नवजागरण प्यार, प्यार सुखद सपन है ॥

 

पावन है प्यार घनसावन है प्यार

मनभावन है प्यार भावनाओं का नगर है

सुरभित फूल हरे जड़ता समूल मानों

सरिता का कूल संवेदना का घर है ।

नेत्र का विषय नहीं प्यार संशय नहीं

 

 
 
     
   
 
     
 
 

नज़र न आये पर नैन की नज़र है ।

साज़ में सितार झंकृत करे तार

आत्मा का विस्तार प्यार अजर अमर है।

 

सागर है प्यार रसगागर है प्यार

यूं उजागर है प्यार, दिन में ज्यों दिनकर है ।

गेह नहीं प्यार सन्देह नहीं प्यार, रूप

देह नहीं प्यार, पर देह में जिगर है ।

नदिया का नीर प्यार शीतल समीर प्यार

द्रौपदी का चीर ये विशाल अम्बर है ।

प्यार है अगाध निर्झर निर्बाध

प्यार जीवन की साध प्यार प्रार्थना का स्वर है

 

हंसवाहिनी का वरदान जो मिला तो हम

लेखनी से शब्द का सिंगार करने लगे ।

कंठ को मिला प्रसाद, कल्पनाओं का प्रासाद

मानवीय धर्म का विचार करने लगे ।

संस्कृति में भारत तो विश्व का शिरोमणि हैं

प्रान्त प्रान्त जाकर प्रचार करने लगे ।

काव्य रसिकों का मिला इतना दुलार हमें

सारी वसुधा से हम प्यार करने लगे ॥

 
 
 
 

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