:: कुँआरा सा साजन ::


 खारा रंग डारा तूने सारा रंग डारा तूने

फिर भी अनाड़ी मुझे प्यारा सा ही लगता

चंद्रमा सा रूप तेरा शीतल स्वरूप तेरा

नभ में दमकता सितारा सा ही लगता

प्रेम की सुगन्ध से महक उठा अंग-अंग

रूप-रंग पहले से न्यारा सा ही लगता

बाल खिसके हैं तो क्या गाल पिचके है तो क्या

साजन तू मुझको कुँआरा सा ही लगता

 
   
 
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
 
     
     
     
 

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