:: कभी रोना कभी खोना ::


वे बोले प्यार है हमसे तो हमपर गीत लिक्खो तुम

यूं रह-रह के विरह में न जलो नवगीत लिक्खो तुम

 

कभी हँसना कभी रोना कभी पाना कभी खोना

है जिसमें हार के भी जीत ऐसी प्रीत लिक्खो तुम

 

खुली आंखो से न दिख पाऊँ मैं तो बन्द से देखो

दिखूँगा मन की आंखों से अगर मनमीत लिक्खो तुम

 

जो सातों सुर से सातों रंग से रंगता है तन मन को

भरे रग रग में जो रस राग वो संगीत लिक्खो तुम


 
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
     
 
     
   
 
     
 

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