:: भाव-सुमन ::


भाव-सुमन उनको अर्पित जो

मुक्त हुए संसार से

कर न्यौछावर तन-मन-धन सब

पाला हमें दुलार से

 हाय! जगत् की ऐसी माया

नश्वर ही है भौतिक काया

किन्तु नहीं मरता वह जग में

हारा नहीं जो हार से

आशा हो प्रेरणा हमारी

पूनम सी रातें उजियारी

श्रीकान्त लक्ष्मी उमा सँग

जुड़ जाएँ एक तार से

 ‘चन्द्र्कला सी शोभा पाएँ

उषा सदृश लाली बिखराएँ

बहे त्रिवेणी मधुर मोहिनी

नमन अश्रु की धार से

 सजल चेतना चित्र निहारे

यश शरीर है बीच हमारे

क्षण भर में ही शान्त हो गए

क्रूर नियति के वार से

 
 
 
 
     
   
 
     
 

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