:: मुझ पर प्रबल हिमपात हो ::


अन्तिम सफ़र तक साथ दे, है बस यही मनकामना

चले तू जिधर, मैं बनूँ डगर, पथ हो तेरा मनभावना

 

तुझसे मैं पतझड़ छीन लूँ तुझे दूँ वसन्त बहार मैं

आँधी मिले मुझे दूँ तुझे मधुवन की मधुर बयार मैं

मधु नेह की बरसात हो, यह मेह से मम याचना

 

मावस की रातें मिलें मुझे, तुझे पूर्णिमा की चाँदनी

मिले ज्योति तारक चाँद की, उजली तेरी हों यामिनी

हर लूँ हरेक तपन तेरी, यह ग्रीष्म से मम याचना

 

मिले हिम की शीतलता तुझे, मुझ पर प्रबल हिमपात हो

छँटे कालिमा की घनी घटा, फिर-फिर नया सुप्रभात हो

रहे प्रीत की नित धूप तुझपर, शीत से मम याचना

 
 

 

     
     
     
     
     
     
     
     
 
     
   
 
     
 

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