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:: मेरे
खारेपन को सफ़र ने निखारा
::
वो
सुहानी डगर वो सुहाना सफ़र
हमको
याद आ गया वो पुराना सफ़र
आप
दो चार पल चल दिये साथ में
बन
गया इश्क़ का एक फ़साना सफ़र
सफ़र
में हँसी है सफ़र में
ख़ुशी है
सफ़र
न हो तो ज़िंदगी
ख़ुदकुशी है
सफ़र
मुझको प्यारा , सफ़र ने संवारा
मेरे
खारेपन को सफ़र ने निखारा
सफ़र
याद आता, सफ़र मुस्कराता
न
गाऊँ अगर तो सफ़र गुनगुनाता
मीत
भी आप हैं प्रीत भी आप हैं
गीत
से बन गया अब तराना सफ़र
सफ़र
एक उलझन सफ़र ही है सुलझन
सफ़र
ही तों मीठी यादों का दरपन
सफ़र
के वो गाने बने हैं फ़साने
जिन्हें भूलने में लगेंगे ज़माने
वो
जंगल में मंगल वो रेतीली राहें
भुला
न सकेंगे भुलाना जो चाहें
दूर
जाते हैं हम पास आते हो तुम
हमको
लगता है कुछ कुछ दीवाना सफ़र |