:: छिड़े प्रेम की रागिनी ::


फूल अगर तुम, सुगन्ध मैं भी

तुम चंदा मैं चाँदनी

आओ सुर में गाएँ हम-तुम

छिड़े प्रेम की रागिनी

 

सांध्यकाल में पाया साथी

बुझ ना जाए नेह की बाती

प्रात-रात तुम बिन सब सूने

सूनी पूनम यामिनी

 

पावस ॠतु-सा वर्षण कर दो

उर में मेरे हर्षण कर दो

नभमण्डल की ओर निहारो

दम-दम दमके दामिनी

 

टूट न जाए तन्तु नेह का

क्षण भंगुर अस्तित्व देह का

कुछ क्षण तो हँस खिल-मिल लें हम

फिर तो चादर बाँधनी

 
 
 
     
     
 
     
   
 
     
 

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