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:: मैं
प्यासी प्यासी की प्यासी
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तुम
बिन सूना घर –
आंगन
साजन
उलझी लट सुलझाओ ।
बीत
गया मनभावन सावन ,
बादल
बनकर छा जाओ ॥
नाम
तुम्हारा सोते जगते मैंने सुबह –
ओ –
शाम लिया ।
धड़कन
–
धड़कन ये कहती है मैंने कब आराम किया ॥
ओ
परदेसी मीत प्यार के गीत मेरे संग
–
संग गाओ ।
मैं
प्यासी प्यासी की प्यासी एक झलक दिखला जाओ॥
बिंदिया कंगन रूठे –
रूठे निंदिया उड़कर दूर गई ।
था
गुरूर कितना ख़ुदपर मुझको पर क्यूं मजबूर हुई॥
सीने
में है जलन घुटन बिरहा की अगन बुझा जाओ।
मैं
प्यासी प्यासी की प्यासी एक झलक दिखला
जाओ॥
सजन
नहीं तो क्या सजना सजनें की बातें बेमानी ।
तुम
अपने मन की करते तो मैं भी करती मनमानी ॥
बहकी-बहकी बातों से अब और न मुझको बहकाओ ।
मैं
प्यासी प्यासी की प्यासी एक झलक दिखला जाओ॥
पलकें भीगी भीगी सी हैं फैल रहा क्यूँ काजल है
मैं
प्यासी प्यासी की प्यासी एक झलक दिखला जाओ॥
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