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:: रूह के
पास ही से गुज़रते हैं वो
::
हमको
मालूम है प्यार करते हैं वो
क्यूं हमें ही जताने से डरते हैं वो
उनकी
आवाज़ सुन के बहकने लगी
ऐसा
लगता है जादू सा करते हैं वो
मेरा
चैन छीना है मुश्किल में जीना
न
सोई न जागी , कहाँ नींद भागी
चुभन
है घुटन है ये घायल सा मन है
बड़ा
बेरहम हाय ! मेरा सजन है
न
सपना है कोई , रहूँ खोयी –
खोयी
मैंने ख़ुद ही काँटो की माला पिरोयी
ज़ुवां भी न खोले, न मिश्री सी घोले
मेरे
प्यार को वो तराज़ू से तोले
बोले
बेहतर है हम अजनबी ही रहें
दिल
में आँखों से फिर क्यूँ उतरते हैं वो
हमको
मालूम् है प्यार करते हैं वो
हथेली की रेखाओं को ख़ुद मिलाया
यूँ
रुख बेरुखी का हमें फिर दिखाया
न
लिखते हैं मुझको न दिखते हैं मुझको
ये
सच है कि पागल समझते हैं मुझको
मैं
हालात पूछूं ख़यालात पूछूं
बड़े
प्यार से ये सवालात पूछूँ |