18. मैं कहती दिल की धड़कन

 

19. प्रेम को समान क्यों नही माना?

 

20. भर देते हो शब्दों में अपना रंग

 

21. ये मन नहीं करता है मनन

 

22. मेरी कल्पनाओं के नायक

 

23. आत्मा तो थी पहले से ही प्यास

 

24. तम नहीं हो सका ख़तम

 

25. ये है मेरा अतीन्द्रिय प्यार

 

26. बड़ा फ़र्क है सन्तति और

सन्तान में

 

27. कमल का स्वभाव कलम से

कहना है

 
28. प्यार का आकार बौना हो गय  
29. राखियों के तार, तार-तार हो गए  
30. आस्था ना ढहे इस नये वर्ष में  
 
 

:: मेरी कल्पनाओं के नायक ::


पाँच अंको के नाटक , यवनिका के उद् घाटक

विधि का विधान , वैचारिक दृष्टि से महान

काव्य के उत्कर्षक , मूढ़ता के अपकर्षक

मोहिनी की माधुरी , जीवन चक्र की धुरी

जीवन पथ प्रदर्शक , प्रसन्नता में लोभहर्षक

स्वास्थ्यवर्द्धक औषधि , आनन्दवर्द्धक महौषधि

सुस्मित आकृति , वैचारिक परिष्कृति

पूर्णिमा के चन्द्र , सप्तकों में मन्द्र

प्रकृति का अमूल्य उपहार, व्यक्तित्व का परिष्कार

विचारों का केन्द्र बिन्दु , गाम्भीर्य में सिन्धु

सागर से अगाध , पूर्ण हुई साध

प्रसन्नता का प्रसाद , आदर्शों का अनुवाद

अतुलनीय अमूल्य रत्न , सफलीभूत प्रयत्न

उज्ज्वल धवल हास , सम्पूर्ण विश्वास

दुर्गुणों का परिहार , सदगुणों का परिवार

शीतलता में चन्दन , आनन्द नन्दन

चित्तरञ्जक हास्य , नृत्य में लास्य

स्नेह का प्रतिमान , दीप्ति में दिनमान

वासनाओं का निर्गमन , इन्द्रियों का दमन

चिरप्रतीक्षित क्षण , पूर्ण हुआ प्रण

दुःस्वप्नों का विस्मरण , आह्लादक स्मरण

देह में प्रान , अधरों की मुस्कान

होठों की लालिमा, अलकों की कालिमा

चेहरे की चमक , बिंदिया की दमक

चूड़ियों की छनक , पायल की झनक

आवाज की खनक , दमकते कनक

और मेरी रसमयी कवितओं के जनक हो

तो तुम पर पिता होने का कर्ज़ है


 
 

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