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मेरी कल्पनाओं के
नायक
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पाँच
अंको के नाटक , यवनिका के उद् घाटक
विधि
का विधान , वैचारिक दृष्टि से महान
काव्य के उत्कर्षक , मूढ़ता के अपकर्षक
मोहिनी की माधुरी , जीवन चक्र की धुरी
जीवन
पथ प्रदर्शक , प्रसन्नता में लोभहर्षक
स्वास्थ्यवर्द्धक औषधि , आनन्दवर्द्धक महौषधि
सुस्मित आकृति , वैचारिक परिष्कृति
पूर्णिमा के चन्द्र , सप्तकों में मन्द्र
प्रकृति का अमूल्य उपहार, व्यक्तित्व का परिष्कार
विचारों का केन्द्र बिन्दु , गाम्भीर्य में सिन्धु
सागर
से अगाध , पूर्ण हुई साध
प्रसन्नता का प्रसाद , आदर्शों का अनुवाद
अतुलनीय अमूल्य रत्न , सफलीभूत प्रयत्न
उज्ज्वल धवल हास , सम्पूर्ण विश्वास
दुर्गुणों का परिहार , सदगुणों का परिवार
शीतलता में चन्दन , आनन्द नन्दन
चित्तरञ्जक हास्य , नृत्य में लास्य
स्नेह का प्रतिमान , दीप्ति में दिनमान
वासनाओं का निर्गमन , इन्द्रियों का दमन
चिरप्रतीक्षित क्षण , पूर्ण हुआ प्रण
दुःस्वप्नों का विस्मरण , आह्लादक स्मरण
देह
में प्रान , अधरों की मुस्कान
होठों की लालिमा, अलकों की कालिमा
चेहरे की चमक , बिंदिया की दमक
चूड़ियों की छनक , पायल की झनक
आवाज
की खनक , दमकते कनक
और
मेरी रसमयी कवितओं के जनक हो
तो
तुम पर पिता होने का कर्ज़ है
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