18. मैं कहती दिल की धड़कन

 

19. प्रेम को समान क्यों नही माना?

 

20. भर देते हो शब्दों में अपना रंग

 

21. ये मन नहीं करता है मनन

 

22. मेरी कल्पनाओं के नायक

 

23. आत्मा तो थी पहले से ही प्यास

 

24. तम नहीं हो सका ख़तम

 

25. ये है मेरा अतीन्द्रिय प्यार

 

26. बड़ा फ़र्क है सन्तति और

सन्तान में

 

27. कमल का स्वभाव कलम से

कहना है

 
28. प्यार का आकार बौना हो गय  
29. राखियों के तार, तार-तार हो गए  
30. आस्था ना ढहे इस नये वर्ष में  
 
 

:: मेरे सात पति ::


जिसमें सृजन है हार नहीं प्यार है

विवाह तो भाव भावना का जोड़ है

सच्चे दाम्पत्य का आनन्द बेजोड़ है

आप आश्चर्य चकित होंगे कि मैंने द्रौपदी को

भी मात कर दिया ? उसके पाँच थे

मैने सात को वर लिया ? तो सुनिये सुनिये

ये पत्नी को दांव पर नहीं लगाते   रस की छांव में बिठाते हैं

ये पत्नी की अग्नि परीक्षा नहीं लेते  उसे दीक्षा देते है

ये क्रोधवश पत्नी को पत्थर नहीं बनाते  पत्थर पिघलाते है

ये पत्नी को सोता हुआ छोड़कर वैराग नहीं लेते नए राग देते है

ये पत्नी को लाञ्छित नहीं करते  वाञ्छित सुख देते हैं

ये पत्नी का शोषण नहीं पोषण करते है

ये पत्नी पर बरसते नहीं सरसते है

इनसे पत्नी को वेदना नही संवेदना मिलती है

इनसे पत्नी को दुत्कार नहीं सत्कार मिलता है

इनसे पत्नी को ख़ार नहीं प्यार मिलता है

इनसे पत्नी तिरस्कृत नहीं पुरस्कृत होती है

ये पत्नी को कलंकित नहीं अलंकृत करते है

इनसे पत्नी को अपकर्ष नहीं उत्कर्ष मिलता है

ये पत्नी को दर्द नहीं देते हमदर्द हैं

ये पत्नी पर सन्देह नहीं नेह रखते हैं

ये पत्नी को अशान्ति नहीं कान्ति देते हैं

इनके लिए पत्नी भोग्या नहीं सुयोग्या है

ये पत्नी को भय नहीं अभय प्रदान करते है

ये विग्रही नहीं अनुग्रही हैं

ये विकृत नहीं चमत्कृत करते हैं

ये स्वेच्छाचारी नहीं संचारी हैं

ये ज़हरीले नहीं सुरीले हैं


 
 

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