18. मैं कहती दिल की धड़कन

 

19. प्रेम को समान क्यों नही माना?

 

20. भर देते हो शब्दों में अपना रंग

 

21. ये मन नहीं करता है मनन

 

22. मेरी कल्पनाओं के नायक

 

23. आत्मा तो थी पहले से ही प्यास

 

24. तम नहीं हो सका ख़तम

 

25. ये है मेरा अतीन्द्रिय प्यार

 

26. बड़ा फ़र्क है सन्तति और

सन्तान में

 

27. कमल का स्वभाव कलम से

कहना है

 
28. प्यार का आकार बौना हो गय  
29. राखियों के तार, तार-तार हो गए  
30. आस्था ना ढहे इस नये वर्ष में  
 
 

:: प्रेम चाहता है क्षेम ::


जिसका जन्म है उसका है मरण

यही है सृष्टि का संक्षिप्त व्याकरण

सुख दुःख

बदलते हैं रुख

लाभ हानि

की अज्ञात है कहानी

रात  - प्रभात

हैं चक्र या चक्रवात

जीत   -  हार

भरते हैं नवसंचार

गीत   -  छन्द

लिखवाते हैं अन्तर्द्वन्द

मिलन बिछुड़न

है तपन जलन

प्रकाश तम

नहीं होते ख़तम

इच्छाएं कामनाएं

भस्म करती है साधनाएं

रुदन  -  हास

कभी पतझड़ कभी मधुमास

संयोग वियोग

हैं सांसारिक  भोग

क्रोध   -   मोह

बढ़ाते है द्रोह


 
 

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