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एक-दूजे की राह
बनेंगे
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इतिहास ने मधुर सुरों में, गीत हमारे गाए हैं
प्रेम-त्याग के बीज धरा पर, हमने ही बिखराए हैं
हम
हिन्दी, हम हिन्दुस्तानी, ज्ञानी, ध्यानी औ’
बलिदानी
हमसे
ही तो स्वर्ग सजेगा, धरती का हर वर्ग सजेगा
जाति-पाति का भेद नहीं है, धर्मों का मतभेद नहीं है
एक
कर्म है, एक धर्म है, एक भाव है, एक मर्म है
एक
तान है, एक गान है, एक आत्मा एक प्रान है
भारत-भू को देख देवता, मन ही मन हरषाए हैं
प्रेम-त्याग के बीज धरा पर, हमने ही बिखराए हैं
हम
धरती की चाह बनेंगे, एक-दूजे की राह बनेंगे
सच
के पहरेदार बनेंगे, हमीं कण्ठ का हार बनेंगे
जन-जन के मन तक जाएँगे, जन-गण-मन, मन से गाएँगे
जन-जन की पीड़ा हर लेंगे वक्त पड़ा मृत्यु वर लेंगे
गौरव
नष्ट न होने पाए, स्वाभिमान ध्वज-सा लहराए
जगमग
जीवन ज्योति के हम ये, दीप जलाकर लाए हैं
प्रेम-त्याग के बीज धरा पर, हमने ही बिखराए हैं
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