18. मैं कहती दिल की धड़कन

 

19. प्रेम को समान क्यों नही माना?

 

20. भर देते हो शब्दों में अपना रंग

 

21. ये मन नहीं करता है मनन

 

22. मेरी कल्पनाओं के नायक

 

23. आत्मा तो थी पहले से ही प्यास

 

24. तम नहीं हो सका ख़तम

 

25. ये है मेरा अतीन्द्रिय प्यार

 

26. बड़ा फ़र्क है सन्तति और

सन्तान में

 

27. कमल का स्वभाव कलम से

कहना है

 
28. प्यार का आकार बौना हो गय  
29. राखियों के तार, तार-तार हो गए  
30. आस्था ना ढहे इस नये वर्ष में  
 
 

:: सरस्वती वन्दना ::


माँ मुझे दो स्वर का दान

तव कृपा से छेडूँ तान

सतगुण भरपूर आएँ

रजस तमस दूर जाएँ

 

लेखनी में तीक्ष्ण धार

दीन-जन से होवे प्यार

स्वार्थ, क्षुद्र भाव छोडूँ

ज्ञान की दो मुझको खान

 

हंस सा विवेक दो माँ

मूढ़ता तुरत हरो माँ

दूर करो निखिल ताप

नित बढ़ाओ यश औ मान

 

सृजन से अमर बनाओ

मनन से अजर बनाओ

देह-त्याग जब करूँ मैं

गाते गाते छोडूँ प्राण


 
   
 
     
     
     
     
     
     
     
     
 
     
     
     

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