:: सदी सा एक पल गया ::


तुम क्या गए कि ज़िंदगी का रूप ढल गया

आँखों का बाँध टूट के बहकर निकल गया

तुम पास थे तो वक्त की रफ़्तार तेज़ थी

तुम दूर क्या गए सदी सा एक पल गया


:: नव बर्ष ::


हो निरन्तर सृजन इस नए वर्ष में

स्वस्थ चिन्तन मनन इस नए वर्ष में।

शब्द और अर्थ ही इष्ट हों मित्र हों

कीर्ति चूमे गगन इस नए वर्ष में ॥


 
   
 
     
     
     
     
     
     
     
  मुक्तक
 
 

मुक्तक - 1

 
  मुक्तक - 2  
     
   
 

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