:: तीस ग्राम आत्मा ::


 

 

एक बार

स्वर्ग लोक से

कवि सम्मेलन का

निमन्त्रण आया

देवताओं के मध्य

कविता-पाठ की

सूचना मात्र से

ही मन हर्षाया

देवराज ने कहा,

बस शरीर

छोड़ना है

चन्द घंटों

के लिए

स्वजनों से

मुँह मोड़ना है

देह को वहीं

छोड़कर आइए

आत्मा को ही

स्वर्ग तक लाइए

काव्य-पाठ

आपकी आत्मा

ही करेगी

देह स्वर्ग में

नहीं विचरेगी

हमारे वैज्ञानिकों ने

आत्मा का वज़न

तीस ग्राम बताया है

असंख्य ने धरती

 

पर अपनी

आत्मा को

सताया है

पर आप तो

कवयित्री हैं

और पढ़ाती भी हैं

श्रोताओं और

बालकों का

ज्ञान बढ़ाती भी हैं

फिर आपसे

पारिश्रमिक के

विषय में

क्या कहना

बस ज्ञान

और दान ही है

आपका गहना

हमने कहा

पेमेन्ट स्पष्ट

बताइए

कवियों की रेट

लिस्ट हमें दिखाइए

देवराज ने कहा

जिसकी आत्मा का

जितना वेट होगा

उतनी ही

उस कवि का

रेट होगा

एक ग्राम

 

 
 
 

Continue>>>

 
 
     
   
 
     

मुख्य पृष्ठ | कृतियां | अपनों की नज़र में | अपनी विशेष सूची में जोड़ें | सम्पर्क

 

परिचय | गीत | मुक्तक | छन्द | कविता | व्यंग्य रचनायें | व्यंग्य गीत | ग़ज़ल | चित्र दीर्घा  | मित्र को बतायें | अपने विचार लिखें | प्रैस

 

सर्वाधिकार सुरक्षित © 2006 | इ-मेल: mail@madhumohini.com