:: भूचाल, झटके के बाद भी हलाल ::


 

 

गुजरात में आया

भयंकर भूचाल

मेरे मन में

उठा एक सवाल

क्या प्रकृति हमारी

आज़ादी से

ख़ुश नहीं ?

धरती के क्रोध

पर किसी का

अंकुश नहीं ?

जब देश में

हो रही थी

सांस्कृतिक लीला

तब असंख्य को

कुपित धरती ने

क्यों लीला ?

एक तरफ थिरक

रहे थे पाँव

दूसरी तरफ

धँस रहे थे

 

गाँव

एक तरफ जश्न

दूसरी तरफ

ज़िंदा दफ़्न

एक तरफ

वाह-वाही

दूसरी तरफ तबाही

लिखने के लिए

मैने कई बार

लेखनी उठायी

लेकिन सच

मानिए मेरी

लेखनी कुछ भी

नहीं लिख पायी

क्योंकि लिखने

के लिए कुछ

भी नहीं बचा था

चारों ओर

हाहकार मचा था

लेकिन मैंने

 

 
 
 

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