:: प्रेम एक पावन झरना ::


तब ही फहरेगा प्यार का परचम

वास्तव में तन से तन नहीं

सुर से सुर का संगम है प्यार

जो गाता है वसन्त लाता है बहार

जीते जी लिख देती हूँ प्यार का व्याकरण

कविता ही करेगी भ्रान्तियों का निराकरण

प्यार है अहसास , अटल विश्वास

आत्मा की आवाज़ , सुरीला साज़

हृदय की पुकार , भावनाओं की झंकार

मर्मस्पर्शी अनुभूति , न कि वैभव या विभूति

आत्माओं का मिलाप , न कि देह का प्रलाप

आंखो की भाषा , जीवन की अभिलाषा

सहज मुस्कान , अपनेपन की पहचान

देह का गायन , रस रसायन

आवाज़ की मधुरता , चितवन की चतुरता

अनवरत स्मरण , जीवन , न कि मरण

नैराश्य का अन्त , प्रसाद में अनन्त

धरा का आधार, गगन का विस्तार

अपनेपन का आभास , रोम - रोम में उल्लास

दैवीय सृष्टि , नेह की वृष्टि

अहंकार का त्याग , सहज अनुराग

 
 
 
 

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