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एक
दिन एक संयोजक का फ़ोन आया
मधु
जी ! सुन्दर सी कवयित्री का नाम बताएंगी
दरसल
‘कवि’ जितना ओल्ड होता जाता है
मंच
के लिए उतना ही गोल्ड होता जाता है
लेकिन कवयित्री जब एजेड हो जाती है
तो
मंच पर आउटडेटेट ही नहीं लो ग्रेडेड भी हो जाती है
मंच
पर कवयित्री की स्थिति कवियों से सर्वथा भिन्न है
पिछले आयोजन में एजेड कवयित्री बुलाने से जनता बड़ी खिन्न है
इसलिए कवयित्री तो कोमल, कमनीय एवं दर्शनीय ही चाहिए
सौंदर्य में अनिर्वचनीय ही चाहिए
कविताओं के लिए तो कवियों की भरमार है
सुदर्शनीया कवयित्री ही मंच का श्रृंगार है
यदि
हम कवयित्री रिपीट करेंगे
तो
श्रोता हमें बीट कर देंगे
न
चन्दा मिलेगा न सहयोग
ठप्प
हो जाएगा हमारा कवि-सम्मेलन का उद्योग
इसलिए अगले आयोजन में भी कवयित्री बेहद ख़ूबसूरत ही चाहिए
सौंदर्य में ऐश्वर्या की मूरत ही चाहिए
हमने
कहा बहुत अच्छे बहुत अच्छे
कविता नहीं वनिता चाहिए
सुन्दरता कविता में नहीं तन में चाहिए
तो
जाइए कोई और फ़ोन लगाइए
हमारे पास तो सरस्वती का दिया हुआ अक्षय शब्द भण्डार है
असंख्य श्रोताओं का प्यार है
कविता को प्रौढ़ होते ही यदि गौण बनाएगे
तो
सरस्वती के मन्दिर तक दौड़ नहीं पाएगे
क्योंकि कविता तो एक उपासना है
अविरल गति से चलती साधना है
और
साधना को मंच का प्रपंच तोड़ नही पाएगा
एक
सच्चा पाठक/श्रोता कविता से मुँह मोंड़ नहीं पाएगा
और
कविता रचित हुए बिना रह नहीं पाएगी
माँ
सरस्वती अपनी साधिका का अपमान सह नहीं पाएगी
आपने ग़लत नंबर डायल किया |