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एक वक्त था
जब हमें होंठों की लाली का
बेहद ही चाव था
लिपिस्टिक के अभाव में
बदसूरती का भाव था
साड़ी के शेड से
लिपिस्टिक का शेड मिलाते थे
हरे, नीले, पीले रंगो की साड़ी में
कंट्रास्ट लगाते थे
डे में लाइट,
लाइट में डार्क लगाते थे
मैचिंग आई-शैडो से
चेहरा सजाते थे
रैड साड़ी पर
औरेन्ज नहीं जमती थी
औरेन्ज पर मैजन्टा
ब्यूटी कम करती थी
सभी रंगों के मैच की
लिप्सटिक्स की क़तार थी
जीवन में बनावटी
रंगों की भरमार थी
कलम ने जीवन को
एक नया मोड़ दिया
होठों की लाली को
दुःखियों की बेहाली से जोड़ दिया |
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कलम ने हमें
धिक्कारते हुए कहा
रँगना है तो सबको
एक रंग में रँगो
तुम्हारे होठों की लाली से क्या
उनके जीवन में
ख़ुशहाली आएगी
जो लाल होने से पहले ही
पीले पड़ गये हैं
भूख ग़रीबी और बेकारी से जिनके
जीवन के
तमाम वसन्त
पतझड़ में बदल गये हैं
यदि नहीं है ऐसी लिपिस्टिक
तो लाल स्याही से
लिखो एक संदेश
राष्ट्र के उन कर्णधारों
के नाम,
जो सबको एक रंग में रंगता हो
जहाँ कंट्रास्ट नहीं
मैच की ही समता हो
तब ही देश में ख़ुशहाली होगी
सभी के होठों पर
वास्तविक लाली होगी |