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एक दिन
रोज़ की भाँति
हम मच्छरदानी
लगाए लेटे थे
मन में
कविता के
असंख्य भाव
समेटे थे
तभी मच्छरदानी
के बाहर
सैकड़ों मच्छर
भुनभुनाने लगे,
कविता लिखो,
कविता लिखो
ऐसा गुनगुनाने लगे,
हमने पूछा
किस पर
लिखवानी है ?
कहने लगे
बड़ी दर्द
भरी कहानी है
हम हज़ारों
की संख्या में
दिल्ली में डेंगू
फैलाने के |
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चक्कर में उड़े
हमारे काटे
या तो अस्पताल
पधार गए
या स्वर्ग
सिधार गए
फिर हमने
मंत्रालयों में
जाने की मंत्रणा की
मंत्रियों ने
सचमुच हमें
घोर यन्त्रणा दी
हम मिनिस्ट्री
में क्या गए
हमारा करेक्टर
ही मिस्टीरियस
हो गया
उन्हें काटने वाला
हर मच्छर
हिस्टीरियस हो गया
तुम हमारी
प्राब्लम कविता के
माध्यम से
पूरे देश में
बताना क्योंकि |