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भारतीय रेल,
नहीं-नहीं
ज़िन्दगी से खेल
यह भी नहीं, सीधे
स्वर्ग पहुँचाने
वाली मेल
मारते ही ऐसे
गुल खिलाती है
मृतक के परिवार
को चार लाख
दिलाती है
जीते जी आप
कितना ही सफ़र करें
लेकिन मरने के
बाद आपका परिवार
सफ़र नहीं करेगा
इधर आप मरिए
स्वर्ग पर पाँव धरिए
आपके शरीर पर
गिद्ध की तरह
लोग टूटेंगे
राहत कार्यों में
लगे पुलिस
कर्मचारी भी लूटेंगे
और यदि आप
रुपयों और गहनों |
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से सजे हैं
तो राहत कार्यों में
लगे लोगों के
और भी मजे हैं
वैसे भी ग़रीबों
और बेरोज़गारों
के लिए तो
ऐसी ट्रेन
वरदान समान है
क्योंकि
मरने के बाद ही
तो देश में सम्मान है
इसलिए जीवन-यात्रा
करते-करते यदि आप
थक जाएँ और
नौकरी ढूँढते-ढूँढते
आपके बाल
पक जाएँ तो
भारतीय रेल में आइए
जीवन से खेल जाइए
आपको कष्टों से
मुक्ति मिल जाएगी
और आपके परिवार को
सुखी जीवन
जीने की राह
मिल जाएगी |