:: पत्नी का होता नहीं फ़िलर जी ::


क्वारों शादी कर लेना ये है मेरी अर्ज़ी

पति पत्नी घर की बिल्डिंग के होते मेन पिलर जी

 एक कुँआरे को कितनी चिन्तायें सताती हैं

मैडम मिश्रा मिश्रा जी के डाई लगाती हैं

जूता चमका नहीं मिले तो लेते रोज़ ख़बर जी

बिन ब्याहे का जीवन तो रसहीन हुआ करता है

जीजा साली सलहेज को निर्द्वन्द्व छुआ करता है

दीवाली होली आते बढ़ जाता और जिगर जी

 पत्नी मर भी जाये तो दूजा ब्याह तुरत होता है

विधवा जैसा जीवन शायद कोई विधुर ढोता है

मायके जाए तो मित्रों संग घर में कटे गदर जी

 पति परमेश्वर पति जगदीश्वर पति सब कुछ होता है

किंतु कुँआरा ईश्वर बनने के अवसर खोता है

फूल खिले बगिया में ज्यों ही होता सुखद सफ़र जी

 टल्लू और निठल्लू की पत्नी व्रत रखती हैं

चन्दा को दे अर्ध्य पाँव छूकर कुछ चखती हैं

आज तो बारह नहीं बजाना बोली मिसिज बनर्जी

 पति पत्नी का जोड़ सदा दम्पति कहलाता है

पत्नी के दम पर ही पति डैडी कहलाता है

सब रिश्ते प्यारे पत्नी का होता नहीं फ़िलर जी

 जोड़े से ही जुड़ जाती तस्वीरें और तक़दीरें

पाणिग्रहण होते ही दो की होती एक लकीरें

एक को चोट लगे तो दूजा रोता शाम सहर जी


 
     
     
     
     
     
     
     
 
     
   
 
     
 

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